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Saturday, November 12, 2011

कन्फेस

चुप नहीं हूं
चुप रहने की आदत है
असहमति के बावजूद
हामी भरने की आदत है
फर्क नहीं पड़ता ये दिखाने की आदत है
हंस नहीं पाता हूं
लेकिन,मुसकुराते रहने की आदत है
खेलना नहीं आता है
बस दांव-पेंच सिखाते रहने की आदत है
कर कुछ नहीं पाता
लेकिन एक बार छू लेने की आदत है

3 comments:

M VERMA said...

सार्थक कन्फेशन

SPIRIT OF JOURNALISM said...

आपका विचार समाज की भावना की अभिव्यक्ति है. हम आपको अपने National News Portal पर लिखने के लिये आमंत्रित करते हैं.
Email us : editor@spiritofjournalism.com,
Website : www.spiritofjournalism.com

अर्चना राजहंस मधुकर said...

मैं जरूर लिखूंगी आपके लिए