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Friday, May 16, 2008

गर फैसला हो तो...

मेरे हलक से भी उतरे
गर फैसला हो तो ऐसा हो

तामील करे मौन दीवारें...
नज़र सजदे में झुक जाए

मेरे ह्ल्क से भी उतरे
गर फैसला हो तो ऐसा हो

इसे आरज़ू कहें
या अर्ज़ी

दरकते जिगर का ख्वाब
बस इतना है...

1 comment:

Udan Tashtari said...

बढ़िया है.