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Tuesday, April 8, 2008

गायत्री की दादागिरी

ईश्वर में मेरी आस्था है लेकिन मुझे कभी नहीं लगा कि इसके लिए मंदिर जाना ही चाहिए और न ही इस बात पर कभी दुखी हुई हूं कि लोग मंदिर या मस्जिद क्यों जाते हैं...लेकिन हर बार मुझे कोफ्त हुआ जब भी धर्म के नाम पर एक आदमी पर हुआ....मुझे तब भी बहुत तकलीफ होती है जब राम सेतू को लेकर संसद से सड़क तक हंगामा होता है.......आजतक मुझे किसी चीज ने इतना आहत नहीं किया जितना भागलपुर दंगे ने और फिर उसके बाद गुजरात दंगे ने.....लेकिन जैसे जैसे ये मामले ठंडे पड़ते गए मेरा मन भी शांत हो गया.....कल एक बार फिर इसी तरह की तकलीफ ने मेरे ज़ेहन में एक बार फिर सिर उठाया.....जब एक फ्रीलांस पत्रकार ने अपनी आप बीती बताई.....नाम है रमन कुमार...पटना का रहने वाला है......पिछले कुछ साल से दिल्ली में पत्रकारिता कर रहा है.....पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वो जनसत्ता, जनादेश जैसे अख़बारों के लिए काम करता रहा है....उसने लोक सभा टीवी के लिए भी काम किया है....आज कल बेरोजगार है.......एक अदद नौकरी की तलाश है.......नौकरी आज मिल जाएगी, कल मिल जाएगी...हर रोज कहीं न कहीं उसका इंटरव्यू और टेस्ट होता है...अकेले लाइव इंडिया में वो तकरीबन तीन बार टेस्ट और चार बार इंटरव्यू दे चुका है......लेकिन किसी न किसी बात की कमी बताते हुए उसे नकार दिया जाता है.....परेशान होकर उसने घर लौटने का फैसला कर लिया......और फरवरी में वह घर चला गया......लेकिन लड़के की किस्मत बुरी...नेपाल जाने से कपार थोड़े ही साथ छोड़ देता है.....कपार माने किस्मत......कपार मतलब सिर,माथा, तकदीर उसमें जो लिखा होता है वही होता है.....ऐसा हमारे अंगिका में कहा जाता है.....सर मुंडाते ही ओले पड़ गए....ज़नाब घर क्या गए......हवालात की हवा खा आए......गलती ये कि वो किसी का भाई है......घर तो वो इसलिए गया था कि वहां जाकर अपनी पीड़ा पिता जी को बता सके, ताकि उसे दो चार महीने और स्ट्रगल करने की छूट मिल जाए......लेकिन कहां......जिस रात वो घर पहुंचा उसी रात पुलिस घर पर पहुंची और उसे हवालात पहुंचा दिया.......रमन ने पूछा भाई ऐसी क्या बात हो गई....तो पुलिस कहती है.....तुम्हारे बड़े भाई ने शिकायत दर्ज कराई है कि तुम लोग उसे अपनी मर्जी से शादी नहीं करने दे रहे....रमन के लिए ये सब अंचभे की तरह था...क्योंकि वो नहीं जानता था कि उसका भाई कहीं शादी कर रहा है.....उसने यही बात पुलिस से कही.....लेकिन पुलिस कहां सुनती है....आई है तो किसी को तो लेकर जाएगी......भैया रमन भी वैसे ...चल दिए पुलिस के साथ....थाने में बैठे बैठे शाम हो गई....इस बीच रमन ने पचासों बार पूछा कि भाई ये तो बताओ कि कब तक बिना वजह ऐसे ही बिठाए रखोगे इसपर पुलिस कहती है कि हम बिठाएंगे थोड़े ही अब तो जेल भेजेंगे....और उसे जेल भेज दिया गया.....पंद्रह दिन बाद वो रिहा होकर आया....दो दिन पहले दिल्ली आया है....कल शाम उससे मुलाकात हुई....उसने बताया...................................................
मेरे भैया गायत्री नाम के एक धार्मिक संस्था के साथ जुडे हैं....इस संस्था से जुड़े लोग शादी भी संस्था के भीतर ही करते हैं......मैने पूछा तो इस बात से तुम्हें जेल क्यों जाना पड़ा... रमन का जवाब था क्योंकि मेरे भाई और गायत्री संस्था के लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि संस्था में ही शादी करने की वजह से शादी का विरोध होगा और संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया जाएगा......संस्था का कहना है कि शादी के बाद लड़की हमारे घर में रहेगी.....मैने कहा वो सब तो ठीक है लेकिन जेल वाली बात कहां से आई....वो कहता है...दरअसल, पुलिस को संस्था की तरफ से पैसे दे दिए गए थे.....और वो वही कर रही थी जो संस्था के लोग कह रहे थे....मैने पूछा ये बताओ तुम लोगों ने शादी का विरोध तो नहीं किया था....रमन ने कहा- पिताजी ने भैया से ये कहा था कि शादी करनी है तो पहले कमाना धमाना शुरू करो.....मेरे पिताजी घर में अकेले कमाने वाले हैं....उन्हीं को हम सबका खर्चा उठाना पड़ता है.....इसलिए उन्होंने कहा कि शादी के पहले कुछ कमाओ......या फिर शादी करो तो खर्चे के लिए हमारे पास मत आना...मेरी अब उम्र हो चली है मैं खर्चा नहीं उठा सकता...लेकिन संस्था कहती है कि वो लड़की को अपने घर में रखे और उसका खर्चा वहन करे.....लड़का काम नहीं कर सकता क्योंकि वो धर्म की सेवा करता है...अनर्थ के बीच मैं उठी......और उससे कहा अब चुप रहो.....मैं सोचने लगी कि आखिर धर्म का क्या मतलब होता है...आस्था क्या सिखलाती है...ये कि काम मत करो...ये कि घर के बुजुर्गों पर अत्याचार करो....और कानून क्या कहता है....कि निर्दोष को जेल भेज दो......

1 comment:

apurn said...

dharm ka aaj ke jamane isse jyada matlab rah bhi nahin gaya hai , jiske paas paisa hai vo paise se bhagwan ko khush karna chata hai , jiske paas nahin hai vo dharam ke naam pe kamana chata hai, ab vo jamana nahin jab dhram aur aashtha ko man se jod kar dekha jaye