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Saturday, June 7, 2008

तुसाद से गांधी को ले आओ...

लंदन के तुसाद म्यूज़ियम में स्टेच्यू लगना अपने आप में बहुत बड़ी बात होती है.. ऐसा अक्सर कहा जाता है....लेकिन ये बात उनलोगों के लिए सही है जिन्हें दुनिया में मशहूर होना बाकी है....
महात्मा गांधी तुसाद से कहीं बडी शख्सियत है....और वो सिर्फ अपने देश भारत के लिए ही नहीं जीते थे.....गांधी के विचार को पूरी दुनिया मानती है...पूरी दुनिया जानती है....इसे न तो किसी को जनाने की जरूरत है और न ही गांधी क्या हैं इस बात की सबूत देने की जरूरत है....इसलिए बेहतर तो यही होगा कि भारत सरकार गांधी की स्टेच्यू को ससम्मान भारत ले आए...गांधी की प्रतिमा को डस्टबिन के पास रखना अपने आप में शर्मनाक बात है....और बेशक ये भारत को बताने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए...इसके लिए तो पहला विरोध लंदन में ही होना चाहिए....जो शायद किसी वजह से नहीं हो पाया है...वरना लंदन में भी गांधी को पूजने वालों की कोई कमी नहीं है....
तुसाद कतई गांधी से बड़ा नहीं हो सकता....गांधी की प्रतिमा पहले टॉप लीडर्स की श्रेणी में लगी थी जिसे बाद में आइस पार्लर के पास ले आया गया...और मूर्ति के बगल में डस्टबिन भी रख दिया.... इस घटना में तुसाद मैनेजमेंट की लापरवाही भी साफ दिखती है...क्योंकि इस पूरे मामले से यही जाहिर होता है कि मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि जिन लोगों के स्टेच्यू यहां लगे हैं उनकी शख्सियत क्या है....या फिर म्यूजियम को इस बात की गफलत है कि यहां बनी प्रतिमा सिर्फ पुतला मात्र है...कोई शख्सियत नहीं....
इस घटना के बाद मुझे गांधीवादी अनुपम मिश्र की वो बात भी याद आती है कि "फोटू छापनी है तो शाहरुख खान का छापो, मेरे तो विचार छापो आप बस"
अनुपम जी से अक्सर जब फोटो मांगे तो वो यही जवाब देंगे....
अब देखिये न जहां बिग बी हों....जहां एश्वर्या जी हों....और तो और बॉडी वाले सलमान भी हों वहां गांधी क्यों हो?

9 comments:

DR.ANURAG ARYA said...

aaj hi kahi padha tha is baare me.aapke vicharo se sahmat hun.

रंजू ranju said...

सही लिखा है आपने

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

अनुपम मिश्र जी गांधी जी के विचारों के ध्वजवाहक है उन्होंनें सब कुछ कह दिया । धन्यवाद

आरंभ

अतुल said...

आपके विचारों से सहमत हूं.

विनीत उत्पल said...

चे-चेपों करने से कुछ नहीं होने वाला. गांधीजी को ऐसे-वैसे में ना तौला जाये. उन्हें तो नोबेल पुरस्कार नहीं मिला तो क्या उनका कद छोटा हो गया. नहीं ना. तो मैड्म तुसाद मामले में भी यही बात है. पुतला हटाने से भी उनकी मह्त्ता बरकरार ही रहेगी.

विनीत उत्पल said...
This comment has been removed by the author.
Udan Tashtari said...

पढ़ा जी इस विषय पर.

Anonymous said...

gandhi ho ya koyee or--kam nikal jata hai to vastu, log, mahatma sab kure me dal dete hain log.landanwalon ko gandhi ki kya jarurat? Apne desh me bhi aajadi mil jane ke bad matlabparaston ne gandhijee ko khub rulaya hai.ek ne to goli hee mar dee.jabh bhi koye gandhi banta hai to log unhen golee mar dete hain.

Anonymous said...

kuch taza bhi likhiye